Liver Detox-पेट की चर्बी और अतिरिक्त वज़न कम करें नैचुरली
आजकल हर व्यक्ति यह चाहता है कि उसकी जीवन शैली स्वस्थ रहे एवं पेट की चर्बी और वजन कम रहे। इसके लिए वह बहुत प्रकार के व्यायाम और डाइट को अपनाता है लेकिन वह लिवर की महत्वपूर्ण भूमिका को नज़र अंदाज़ कर देता है। लिवर मानव शरीर का सबसे बड़ा आतंरिक अंग है वसा के टूटने ( breakdown of fat) सहित चयापचय (metabolism) में बहुआयामी भूमिका निभाता है। Liver Detox करने के लिए प्राकृतिक जड़ी-बूटियों और पौधों की शक्ति का उपयोग करके, आप इसके कार्य को बढ़ा सकते हैं, वसा चयापचय (Fat metabolism) को बढ़ावा दे सकते हैं। इस प्रकार पेट की चर्बी और अतिरिक्त वज़न कम कर सकते हैं नैचुरली।

लिवर
वज़न कम करने में लीवर की भूमिका (Liver’s Role In Weight Loss) –
लिवर डेटोक्सिफिकेशन ( यकृत विषहरण ) के लाभों के बारे में जानने से पहले, शरीर के सम्पूर्ण मेटाबोलिज्म में लीवर के कार्यों को समझना बहुत जरूरी है।
वसा चयापचय (Fat Metabolism) –
लिवर वसा को संसाधित करने (processing fats) अतिरिक्त कार्बोहाइड्रेट और प्रोटीन को फैटी एसिड में परिवर्तित करने और कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स को बनाने का कार्य करता है। जब लिवर विषाक्त पदार्थों या अस्वास्थ्यकर वसा से भर जाता है, तो वसा को कुशलता से चयापचय करने की इसकी क्षमता कम हो जाती है, जिससे वजन बढ़ने लगता है, खासकर पेट के आसपास।
विषहरण ( Detoxification) –
लिवर का सबसे प्राथमिक कार्य detoxification का है। यह रक्तप्रवाह से विषाक्त पदार्थों, दवाओं और अन्य हानिकारक पदार्थों को फ़िल्टर करता है, उन्हें निष्क्रिय करता है या शरीर से बाहर निकालता है। हालाँकि, एक अतिभारित लिवर (overloaded liver) इस प्रक्रिया में कम प्रभावी होता है, जिसके परिणामस्वरूप विषाक्त पदार्थों का निर्माण, सूजन और चयापचय असंतुलन हो जाता है।
चयापचय का विनियमन (Regulation Of Metabolism) –
लिवर अतिरिक्त ग्लूकोज को ग्लाइकोजन के रूप में संग्रहित करके और जरूरत पड़ने पर इसे जारी करके रक्त में ग्लूकोज के स्तर को विनियमित(regulate) करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह पित्त का भी उत्पादन करता है, जो वसा के टूटने और अवशोषण के लिए आवश्यक एक पाचन तरल पदार्थ है।
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लिवर विषहरण के लिए प्राकृतिक जड़ी बूटियां और पौधे (Natural Herbs and Plants for Liver Detox) –
Liver Detox के जरिए हम लिवर की कार्यप्रणाली बेहतर कर सकते हैं और इसकी विषाक्त पदार्थों को ख़त्म करने की क्षमता को भी बड़ा सकते हैं। इस कार्य को प्राचीन समय से ही प्राकृतिक जड़ी बूटियों और पौधों के द्वारा आसानी से किया जाता रहा है।
मिल्क थीस्ल (Milk Thistle) :
मिल्क थीस्ल प्राचीन काल से ही अपने एंटी ऑक्सीडेंट और एंटी इंफ्लेमेटरी गुणों से भरपूर लिवर के लिए सबसे अच्छी जड़ी बूटी या पौधे के रूप में जाना जाता है। इसमें सिलिमरीन (Silymarin) नामक एक यौगिक पाया जाता है जो लिवर कोशिकाओं को क्षति से बचाने में मदद करता है और पुनर्जनन को बढ़ावा देता है। अध्ययनों से यह पता चला है कि दूध थीस्ल लिवर डेटोक्सिफिकेशन में सहायता करता है और सम्पूर्ण लिवर की कार्य प्रणाली में सुधार करता है।

मिल्क थीस्ल
कैसे उपयोग करें : मिल्क थीस्ल को चाय( पानी में उबालकर ग्रीन टी ) के रूप में, सप्लीमेंट्स व इसके एक्सट्रेक्ट के रूप में उपयोग किया जा सकता है।
सिंहपर्णी की जड़ (Dandelion Root) :
सिंहपर्णी जड़ अपने मूत्रवर्धक गुणों के लिए बेशकीमती है। यह मूत्र उत्पादन को बढ़ाकर और विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालकर यकृत (liver) और गुर्दे (Kidney) की कार्य प्रणाली में सहायता करती है। इसके अतिरिक्त, इसमें एंटीऑक्सिडेंट और कड़वे यौगिक होते हैं जो पित्त उत्पादन को उत्तेजित करते हैं और पाचन को बढ़ावा देते हैं। इसके साथ इसमें विटामिन्स और मिनरल्स भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं।

डैंडेलियन
कैसे उपयोग करें : इसकी ताज़ी हरी पत्तियों को सलाद के रूप में और डैंडेलियन की जड़ को चाय बनाकर अर्थात पानी में उबालकर ग्रीन टी के रूप में लिया जा सकता है।
हल्दी (Turmeric) :
हल्दी भारतीय व्यंजन में पीले मसाले के रूप में प्रमुख है। इसमें कर्क्यूमिन (Curcumin), जो कि एक शक्तिशाली सूजनरोधी और एंटीऑक्सीडेंट यौगिक है पाया जाता है। हल्दी विषाक्त पदार्थों से होने वाले नुकसान से लिवर की रक्षा करती है, पित्त प्रवाह में सुधार करती है पाचन और वसा चयापचय में सहायता करने के लिए भी जानी जाती है।
कैसे उपयोग करें : हल्दी का प्रयोग लोग व्यंजन बनाने में तो करते ही है। इसके अलावा आप थोड़ी सी हल्दी को दूध में मिलाकर भी पी सकते हैं यह Golden Milk के रूप में भी जाना जाता है। हल्दी के सप्लीमेंट्स भी लिए जा सकते हैं।
आटिचोक(Artichoke) :
एंटीऑक्सीडेंट और फाइबर से भरपूर, आटिचोक पित्त उत्पादन और प्रवाह को बढ़ावा देकर लीवर के स्वास्थ्य को बढ़ाता है और सूजन को कम करता है। इसमें ऐसे यौगिक भी होते हैं जो कोलेस्ट्रॉल(LDL and Triglycerides) के स्तर को कम करने में मदद करता है। इस प्रकार यह ह्रदय को स्वस्थ रखते हैं और पूर्ण रूप से पाचन स्वास्थ्य को भी बेहतर करते हैं क्योंकि इसमें फाइबर की मात्रा अधिक पायी जाती है।

आटिचोक
कैसे उपयोग करें : आटिचोक की पत्तियों का एक्सट्रेक्ट भी लिया जा सकता है। इसके अलावा इसे उबाल कर सब्जी और सलाद के रूप में भी खाया जाता है।
अदरक (Ginger) :
प्राचीन समय से ही अदरक का उपयोग अनेक बीमारियों के लिए किया जाता रहा है चाहे सर्दी, खांसी हो या पाचन सम्बंधित रोग। इसमें सूजन-रोधी और एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं जो लीवर के स्वास्थ्य को लाभ पहुंचाते हैं। यह पाचन में सहायता करता है, सूजन को कम करता है और फैटी लीवर रोग को रोकने में मदद करता है।
कैसे उपयोग करें : अदरक का प्रयोग सब्ज़ियों में किया जाता है। इसके अलावा इसको ग्रीन टिया के रूप में भी लिया जा सकता है।
मुलेठी (Licorice) :
मुलेठी की जड़ में ग्लाइसीराइज़िन होता है, जो सूजन-रोधी और हेपेटोप्रोटेक्टिव गुणों वाला एक यौगिक है जो लिवर के स्वास्थ्य का समर्थन करता है। यह पित्त उत्पादन को बढ़ावा देने में मदद करता है, विषहरण में सहायता करता है, और विषाक्त पदार्थों और ऑक्सीडेटिव तनाव के कारण लिवर की क्षति( नुकसान) से रक्षा कर सकता है।
कैसे उपयोग करें : मुलेठी को ग्रीन टी या काढ़े की तरह पकाकर पिया जा सकता है।
जिनसेंग (Ginseng) :
ऐसा अध्ययन से पता चला है कि जिनसेंग विशेष रूप से कोरियाई लाल जिनसेंग लिवर के लिए बहुत लाभदायक है। इसमें जिनसैनोसाइड्स नामक सक्रिय यौगिक होते हैं, जिनमें एंटीऑक्सीडेंट और सूजन-रोधी गुण होते हैं जो लिवर के कार्य में सहायता करते हैं और लिवर को क्षति ग्रस्त होने से बचाता है।

जिनसेंग
कैसे उपयोग करें : जिनसेंग को गर्म पानी में डाल कर चाय (Ginseng Tea) के रूप में या सप्लीमेंट्स के रूप में लिया जा सकता है।
लहसुन (Garlic) :
लहसुन एलिसिन (Allicin) जैसे सल्फर यौगिकों से भरपूर होता है, जो शरीर से विषाक्त पदार्थों को खत्म करने के लिए जिम्मेदार एंजाइमों के उत्पादन को बढ़ाकर लिवर के विषहरण ( Liver Detoxification) में सहायता करता है। लहसुन में एंटीऑक्सिडेंट भी होते हैं जो लिवर कोशिकाओं को क्षति से बचाने और सूजन को कम करने में मदद करते हैं।
कैसे उपयोग करें : लहसुन की 1-2 कलियाँ कच्ची खाई जा सकती हैं। इसके अलावा गार्लिक कैप्सूल्स और सप्लीमेंट्स के रूप में भी लिया जा सकता है।
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लिवर डिटॉक्सीफिकेशन कैसे वजन घटाने में मदद करता है (How Liver Detox Promotes Weight Loss) –
इन प्राकृतिक जड़ी-बूटियों और पौधों को अपने आहार में या पूरक (Supplements) के रूप में शामिल करके, आप लिवर के विषहरण (Liver Detoxification ) में मदद ले सकते हैं और वसा को चयापचय ( Fat Metabolism)करने की इसकी क्षमता को बढ़ा सकते हैं। लिवर डिटॉक्सीफिकेशन वजन घटाने में कैसे योगदान देता है आइए जानते हैं इसके बारे में।
बेहतर वसा चयापचय को बेहतर करना (Improved Fat Metabolism) –
एक स्वस्थ लिवर कुशलता से वसा को तोड़ सकता है और उन्हें ऊर्जा में परिवर्तित कर सकता है, जिससे शरीर में, विशेष रूप से पेट क्षेत्र में उनके संचय को रोका जा सकता है।
संतुलित हॉर्मोन (Balanced Hormones) –
लिवर इंसुलिन, कोर्टिसोल और एस्ट्रोजन सहित हार्मोन के स्तर को विनियमित (regulate) करने में मदद करता है, जो चयापचय (metabolism) और वसा भंडारण ( fat storage) में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। लिवर को डिटॉक्सीफाई करके, आप हार्मोनल संतुलन को बढ़ावा दे सकते हैं और वजन बढ़ने से रोक सकते हैं।
उन्नत पाचन (Enhanced Digestion) –
लिवर का मुख्य कार्य पित्त उत्पादन ( Bile production) करना है। जो वसा और वसा में घुलनशील विटामिन के पाचन और अवशोषण में सहायता करता है। बेहतर पाचन से सूजन, कब्ज और अन्य पाचन समस्याओं को ख़त्म किया जा सकता है। जो वजन बढ़ाने में योगदान करते हैं।
सूजन कम करना ( Reduced Inflammation) –
लिवर डेटोक्सिफिकेशन के जरिए हम लिवर की सूजन को कम कर सकते हैं जो कि इंसुलिन प्रतिरोध, मेटाबॉलिक सिंड्रोम और मोटापे के कारण होती है। सूजन कम करके आप अपना मेटाबोलिज्म स्वस्थ कर सकते हैं और इस प्रकार अपना वज़न घटा सकते हैं।
Liver Detox – से वज़न कम करें, जरूरत है थोड़ी सी दिनचर्या बदलने की :
हर्बल सप्लीमेंट (Herbal Supplements) :
लिवर को स्वस्थ और विषहरण (Detoxification) को बढ़ावा देने के लिए मिल्क थीस्ल, डेंडिलियन रूट, हल्दी और अन्य लाभकारी जड़ी-बूटियों से युक्त( ऊपर बताई गईं) लिवर-सहायक सप्लीमेंट लें या इन्हें प्राकृतिक रूप से अपनी डाइट में चाय या काढ़े के रूप में शामिल करें ।
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स्वस्थ आहार (Healthy Diet) :
आवश्यक पोषक तत्व प्रदान करने और लीवर के कार्य को भली भांति सही ढंग से कार्य करने के लिए फलों, सब्जियों, लीन प्रोटीन और स्वस्थ वसा से भरपूर संतुलित आहार का सेवन करना चाहिए । प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ (processed food), शर्करा युक्त पेय पदार्थ और शराब को सीमित करें, जो लीवर पर बोझ डालते हैं और विषहरण(Detoxification) में बाधा डालते हैं।
जलयोजन (Hydration) :
किडनी के कार्य को ठीक प्रकार से करने और शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने के लिए पूरे दिन खूब पानी पीना बहुत जरूरी है।
नियमित व्यायाम (Regular Exercise) :
चयापचय (metabolism) को बढ़ाने के लिए, बड़े हुए फैट को कम करने के लिए तथा पूर्ण रूप से लिवर स्वस्थ रहकर कार्य करे इसके लिए जरूरी है कि नियमित शारीरिक गतिविधियों, व्यायाम आदि को अपनी दिनचर्या में शामिल करें।
तनाव प्रबंधन (Stress Management) :
कोर्टिसोल के स्तर को कम करने और तनाव से संबंधित लिवर को होने वाले नुकसान को रोकने के लिए ध्यान, योग या गहरी सांस लेने के व्यायाम जैसी तनाव कम करने वाली तकनीकों का अभ्यास अवश्य करना चाहिए।
निष्कर्ष (Conclusion) :
अच्छे चयापचय(metabolism), वजन प्रबंधन(weight management) और समग्र कल्याण के लिए एक स्वस्थ लिवर का होना अति आवश्यक है। इसके लिए आप अपनी जीवनशैली में लिवर विषहरण (Liver Detox) में सहायता करने वाली प्राकृतिक जड़ी-बूटियों और पौधों को शामिल करके, आप लीवर के कार्य को बढ़ा सकते हैं, वसा चयापचय (fat metabolism) को बढ़ावा दे सकते हैं। इस प्रकार अपने वजन घटाने के लक्ष्यों को अधिक प्रभावी ढंग से प्राप्त कर सकते हैं। अपने वजन घटाने की यात्रा के हिस्से के रूप में लीवर के स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें, और फिर आप पतली कमर और बेहतर जीवन शक्ति के लाभ प्राप्त करेंगे।
किसी भी नए पूरक (supplement) या विषहरण आहार (Detoxified food) को शुरू करने से पहले एक स्वास्थ्य देखभाल पेशेवर से परामर्श करना याद रखें, विशेष रूप से जो लोग किसी बीमारी से ग्रस्त हैं और दवाइयों को ले रहे हैं। सही दृष्टिकोण और लिवर के स्वास्थ्य पर ध्यान देने के साथ, आप पेट की चर्बी और अतिरिक्त वज़न कम कर सकते हैं नैचुरली। इस प्रकार आप एक स्वस्थ, दुबले-पतले शरीर को प्राप्त करने की यात्रा पर निकल सकते हैं।
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